धन
केतु दूसरे भाव में (कर्क राशि): केतु आपके धन के घर में बैठा है, जो मिश्रित प्रभाव देता है। इसका मतलब यह नहीं कि धन नहीं आएगा, बल्कि यह है कि धन का आना-जाना अचानक या अप्रत्याशित तरीके से हो सकता है। कभी-कभी आपको लगेगा कि धन बिना प्रयास के मिल रहा है, तो कभी अचानक खर्चे बढ़ जाएँगे। केतु पुराने संबंधों या विरासत से भी जुड़ाव दिखाता है। आपके लिए यह सीख है कि धन को स्थिरता देने के लिए एक व्यवस्थित बचत और निवेश की योजना बनाएँ, और अचानक आए धन को तुरंत खर्च करने के बजाय उसे संभाल कर रखें।
बृहस्पति (धन के कारक) वृश्चिक में, छठे भाव में वक्री: बृहस्पति धन का मुख्य कारक ग्रह है, लेकिन यह आपके लिए मिश्रित स्थिति में है। वृश्चिक राशि में होने के कारण यह आपको धन के लिए गहन रणनीति और शोध की ओर ले जाता है। वक्री होने के कारण इसका प्रभाव अंदरूनी और गहरा है – आप धन के मामलों में बाहरी सलाह से ज़्यादा अपनी अंतर्दृष्टि पर भरोसा करेंगे। छठा भाव ऋण, विवाद और सेवा का घर है। इसलिए, धन कमाने के लिए आपको कर्ज या कानूनी पेचीदगियों से सावधान रहना होगा। आपके लिए सबसे अच्छा तरीका यह है कि धन को सेवा या किसी बड़े उद्देश्य से जोड़कर कमाएँ, और किसी भी वित्तीय समझौते को पूरी तरह समझकर ही करें।


